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portada Bharatiya Girmitiya Mazdoor Aur Unke Vanshaj (in Hindi)
Type
Physical Book
Language
Hindi
Pages
178
Format
Hardcover
Dimensions
21.6 x 14.0 x 1.4 cm
Weight
0.36 kg.
ISBN13
9788177213782

Bharatiya Girmitiya Mazdoor Aur Unke Vanshaj (in Hindi)

Shrivastava Dinesh Chandra (Author) · Prabhat Prakashan Pvt. Ltd. · Hardcover

Bharatiya Girmitiya Mazdoor Aur Unke Vanshaj (in Hindi) - Chandra, Shrivastava Dinesh

New Book

£ 35.08

  • Condition: New
Origin: U.S.A. (Import costs included in the price)
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Synopsis "Bharatiya Girmitiya Mazdoor Aur Unke Vanshaj (in Hindi)"

इस पुस्तक में गुलामी प्रथा के उन्मूलन के बाद ब्रिटिश तथा अन्य यूरोपीय देशों द्वारा उन्नीसवीं शताब्दी के तीसरे दशक से लेकर बीसवीं शताब्दी के दूसरे दशक तक भारतीयों को छल-कपट द्वारा गिरमिटिया मजदूर बनाकर दुनिया भर में दक्षिण अमेरिका से लेकर प्रशांत क्षेत्र तक फैले अपने उपनिवेशों में भेजने, भारतीय गिरमिटिया मजदूरों पर होनेवाले जुल्मों और उसके विरुद्ध संघर्ष तथा गिरमिट मजदूरी के उन्मूलन से संबंधित विषयों पर प्रकाश डाला गया है। इन सुदूर उपनिवेशों में औपनिवेशिक शक्तियों का अत्याचार सहते हुए विकट परिस्थितियों में भी इन भारतीय गिरमिटिया मजदूरों ने जिस तरह अपने धर्म एवं संस्कृति को बचाए रखा और इसी के अवलंबन से आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में जो प्रगति की, वह अवश्य ही बहु प्रसंशनीय है। यद्यपि बँधुआ मजदूरी प्रथा का अंत लगभग एक सदी पूर्व हो चुका है, परंतु इन उपनिवेशों में बसे भारतीय मूल के बँधुआ मजदूरों के वंशजों के समक्ष कई समस्याएँ अभी भी मौजूद हैं, जिसका वर्णन इस पुस्तक में किया गया है। भारतीय गिरमिटिया मजदूरों के शोषण और उनपर हुए अमानवीय अत्याचारों की व्यथा-कथा है यह पुस्तक। साथ ही इनसे संघर्ष करके अद्भु&

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The book is written in Hindi.
The binding of this edition is Hardcover.

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